भारत में जनजातीय विरासत के संरक्षण में एन. सी . सी और एन . एस . एस की भूमिका: एक अनुभवात्मक अध्ययन
Keywords:
एन. सी . सी, एन . एस . एस, जनजातीय विरासत, सांस्कृतिक संरक्षण, युवा भागीदारी, अनुभवात्मक अध्ययनAbstract
भारत विश्व की सर्वाधिक जनजातीय विविधता वाले राष्ट्रों में से एक है, जहाँ 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या कुल जनसंख्या का लगभग 8.6 प्रतिशत (लगभग 10.4 करोड़) है तथा 705 से अधिक जनजातीय समूह अधिसूचित हैं (Ministry of Tribal Affairs, n.d.; National Cadet Corps (India), n.d.)। वैश्वीकरण, शहरीकरण एवं आधुनिकीकरण के दबाव में जनजातीय भाषाओं, लोकनृत्यों, हस्तशिल्प एवं मौखिक परंपराओं के क्षरण की आशंका निरंतर बनी हुई है। ऐसे परिदृश्य में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन. सी . सी) और राष्ट्रीय सेवा योजना (एन . एस . एस) जैसे युवा-केंद्रित संगठन, जो राष्ट्रीय एकता शिविरों, विशेष राष्ट्रीय एकीकरण शिविरों (SNIC) एवं "एक भारत श्रेष्ठ भारत" जैसी पहलों के माध्यम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करते हैं, जनजातीय विरासत के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रस्तुत अध्ययन एक अनुभवात्मक (empirical) सर्वेक्षण के माध्यम से पाँच जनजातीय-बहुल राज्यों — झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान के 300 एन. सी . सी एवं एन . एस . एस कैडेटों/स्वयंसेवकों (150+150) के दृष्टिकोणों का विश्लेषण करता है। अध्ययन में संरचित प्रश्नावली, द्वितीयक आंकड़ों तथा वर्णनात्मक सांख्यिकी का प्रयोग किया गया है। परिणाम दर्शाते हैं कि उत्तरदाताओं में जागरूकता का स्तर मिश्रित है (उच्च 41%, मध्यम 39%, निम्न 20%), एन. सी . सी कैडेट लोकनृत्य कार्यशालाओं व पारंपरिक खेलों में तथा एन . एस . एस स्वयंसेवक हस्तशिल्प प्रदर्शनियों में अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय पाए गए, तथा वर्ष 2018 से 2024 के मध्य जनजातीय विरासत केंद्रित शिविरों की संख्या में सतत वृद्धि दर्ज की गई है। अध्ययन के निष्कर्ष जनजातीय भाषा-दस्तावेज़ीकरण को सुदृढ़ करने, डिजिटल संग्रहण तथा जनजातीय समुदायों के साथ प्रत्यक्ष सहभागिता बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।